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पार्किन्सन रोग

कंपवात का रोग ,शरीर के अंगों का कांपना

यह तंत्रिका तंत्र का एक रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं। रोगी लगातार कंपन करता है ।
पार्किन्‍सोनिज्‍म का आरम्भ धीरे-२ होता है। पता भी नहीं पड़ता कि कब लक्षण शुरू हुए। अनेक सप्ताहों व महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ़ जाती है। फिर आदमी को लगता है कि समस्या है , डाँ को दिखाना चाहिए ।

इस रोग के कारण नींद में कम हो जाती है, वजन में कमी, कब्जियत बने रहना, जल्दी सांस भर आना, पेशाब करने में रुकावट, चक्कर आना, खडे़ होने पर आँखों के आगे अंधेरा आना, सेक्स में कमजोरी,चिड़चिडापन, स्मृति कमजोर हो जाती है । खाना ठीक से न खा पाना , अपने बाल सही ढंग से सैट नही कर सकता, पानी पीने , नहाने , कपड़े पहनने में दिक्कत होती है ।

*पार्किन्सन/कंपवात रोग पर मेरी अनुभूत चिकित्सा*
*नुस्खा इस प्रकार है*
खंजनकारी रस -5gm
स्मृतिसागर रस - 5gm
वृहत वात कुलांतक रस - 5gm
ब्राह्मी वटी - 5gm
एकांगवीर रस -5gm
सारस्वत चूर्ण- 30gm
अशवगंधा चूर्ण-15gm
अकरकरा चूर्ण - 10gm
यह सब दवा अच्छी कंपनी की खरीदकर , सबको  कसकर घुटाई करके एकजान करलें,फिर “रोगन मांलकांगनी” में घोटकर सुखा लें, फिर “ब्राह्मी के ताजा रस” में घोटकर सुखा लें,उसके बाद “अशवगंधा के जड़ के ताजा रस” या काढ़े में घोटकर सुखा कर 60पुड़िया बना लें ।
सुबह-शाम 1-1 पुडियाँ शहद से चाटकर , ऊपर के दूध पीएं । मास्यादि क्वाथ 2-2चम्मच पानी में मिलाकर पी लें ।
खाने के बाद - अशवगंधारिष्ट  -10ml
                      सारसत्वारिष्ट    -10ml
                      मास्यादि क्वाथ -10ml         
बराबर गर्म पानी में मिलाकर खाने के बाद लें ।रोगी की सेहत बहुत अच्छी हो जाएगी । यह मेरी अनुभूत चिकित्सा है । बहुत रोगियो पर आजमाई हुई है । बहुत ही लाभकारी है । आजकल के जमाने में कोई अपना तजुर्बा फ्री में नही देता । कोई कुछ न कुछ छुपा ही लेता है । पूरी चीज नही बताता । आप मेरी बताई चिकित्सा जरूर प्रयोग करें ,आपको अवशय लाभ मिलेगा , आप को फ्री में सब दे रहा हुँ,कुछ छुपाता नही । अवशय परयोग करें , लोगों का भी भला करें ।

पार्किन्सन रोग पार्किन्सन रोग Reviewed by Unknown on 2:27 AM Rating: 5

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